♥PaRi...кєѕα нє кση нє ωσ נαηє кαнα нє♥
Friday, January 13, 2012
Friday, July 15, 2011
♥PaRi...кєѕα нє кση нє ωσ נαηє кαнα нє♥ ..2
अब रातें बहुत बड़ी लगती है , उसने आज मुझसे मेरी पिछली ज़िन्दगी के बारे में सवाल किया ,कैसे कहू क्या बताऊ उसे ?किसी से कहने से भी क्या फायेदा जब वो इंसान आपकी भावनाए ही ना समझता हो,बहुत कम मिलते है ऐसे जो बिना कहे ही अंदाज़ा लगा लेते है...और कुछ ऐसे भी है कहने पर भी नहीं समझते.
मैं उसे क्या किसी को भी सच बताने से कतरा सी जाती हूँ , जब कोई कर बैठता है मुझसे ये मुश्किल सवाल ..
बहुत मुश्किल हो जाता है जवाब देना.
शायद वो सवाल इतना भी मुश्किल नहीं है ,मुश्किल मैंने अपने लिए खुद बना ली है
आजकल तो और भी उलझाने जुड़ गयी है, हाँ, वही अनकही सी उलझाने जिन्हें कहना चाहकर भी नहीं कहना चाहती
ज़िन्दगी बिखरे पत्तों की तरह जुदा होती जा रही है ..
आज आँखों में नींद ने दस्तक भी नहीं दी है,बस यादों ने खुली आँखों से ख्वाब बुनने शुरू कर दिए है.
बहुत उत्साहित थी मैं ,ये सोचकर की अपनी ज़िन्दगी का आज हर एक राज़ खोल दूंगी..फिर मन में कोई बोझ लेके जीना नहीं होगा..
आज का पता नहीं कुछ , मेरे कल में सिर्फ वो था..
वो कहता है जिंदगी सबको एक मौका देती है,पर तुम्हे जिंदगी को मौका देना है ,वो तुम्हे नहीं दे सकती.इतना कहकर वो जाने लगा ,मैं चुप चाप बस उसे देखती रह गयी..कुछ समझ नहीं आया के उससे मैं क्या कहूँ?"मैं उसे ये भी यकीन नहीं दिला सकती की हाँ यह मुमकिन है !!! तुम रुक जाओ.
"जिसे रुकना होता है ,वो बिना कहे ही रुक जाता है..क्या पता उसका साथ मेरी जिंदगी में यही तक था? मैं अकेली हूँ ,ये फिर से बाताने के लिए "शुक्रिया" , मुझे इस तरह ही जीने ही आदत-सी हो गयी है..
वो अपनी डायरी से अपने दिन भर का हाल बता रही है....
उसकी माँ उसके रूम की रोशनी देखकर वहा आ गयी और कहा ,"रात को क्या कहानी लिखने बैठ गयी है ?चल सो जा..अब "
वो जितना सोचती है, जिंदगी उसे उतनी ही उलझनों में डाल देती है.
वो पूरी रात बस यही सोचती रही की " वो क्यों ?और कहाँ ? चला गया?"
जिंदगी की कसमकस में जहाँ ,वो उलझी हुई थी,वहा वो फिर वापस आ गया और कहने लगा," तुम्हे क्या लगा ?मैं भी औरों की तरह इतनी जल्दी चला जाऊंगा,तुम ही बस अपने फैसले में अडिग रह सकती हो ?"पता है तुम जहाँ हो,वहां से निकलना जरा मुश्किल है ,पर कोई बताएगा नामुमकिन क्या है इस दुनिया में??"
"कोई ठेहेरता नहीं किसी के लिए...
वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए ,
Sunday, May 22, 2011
Ye Dosti hai ..yaa Pyaar..??
ye tanhai hai,yaa kisi ki yaado ki bochaar hai..?
ye aansu fizool hai,yaa ye dil ka kararr hai..?
ye dosti hai,yaa sirf pyaar hai..
ye dosti hai,yaa sirf pyaar hai..
badi takraar hoti hai is riste me kabhi,
to kabhi ek dusre ke bina rehna duswaar hai..
kabhi betaabi hai,kabhi lout aane ka intzaar hai..
shayad dosti hai ye umarbhar ki,
shayad kuch pal do pal ka sath hai..
ye dosti hai,yaa sirf pyaar hai..
ye dosti hai,yaa sirf pyaar hai..?
Monday, April 25, 2011
ये फ़ासले - 1
वो दूर है मुझसे और पास भी,
उसकी कमी का है एहसास भी,
दूर होके भी वो क्यूँ दूर नहीं
पास होके भी वो क्यूँ पास नहीं..
कितने फासले जुड़ने लगे है
इन राहतों से,
कितने रिश्ते जुड़ रहे है
उसकी आहटों से..
वो कल है मेरा और आज भी,
उसकी याद साथ है आज भी,
दूर होके भी वो क्यूँ दूर नहीं
पास होके भी वो क्यूँ पास नहीं..
कितने दिन उसके बिना कटने लगे है
लौट क्यूँ वो आता नहीं
कैसे कहे वो कितना याद आता है.
एक पल को ख्याल उसका जाता नहीं..
वो दूर है मुझसे और पास भी,
उसकी कमी का है एहसास भी,
दूर होके भी वो क्यूँ दूर नहीं
पास होके भी वो क्यूँ पास नहीं..
Tuesday, April 5, 2011
I am so hungry today is mine and not paying attention. All his work has had enough. There was also a cry ,how all these people?Then I made the last of the loud shouting, "You do not hear all? from when I am hungry, please arrange for me to dinner,Otherwise, I'll destroy the program..
Shouting from the miracle happened, I got dinner.
Now what has happened to this man mad priest? are staring at me why. maybe calling me, but why?
Hey! I was seated in the canopy? Why?
I'm sitting like an idiot, a poor funny unknown guy, very irritation was getting mad a the priest's crap, and I sat near the cartoons.
The drama scene. standing my relatives were smiling, as I punished - they - are going to be killed.
I felt very strange, all this might not want, and what I want,'ll only make.
And I have taken some thinking, I was up there forthwith and mandap was close to a black colur bag, I started to run away with it ...
Then from behind me, my mumy Only heard of, "Now go up, 9 o'clock?"
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Dream, thanks was just a dream, was very dangerous. my life come to life when mumy then gave me a lift.
It was just a dream !!
-horrible dream ever..
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