Friday, January 13, 2012

ये फासलें ..


मुझे नहीं पता !! जिंदगी मुझे कहाँ ले जा रही है?
मुझे तलाश है उसकी ,जिसके बिना ये सफ़र अधूरा है..

कभी कभी डर लगता हैं इन ख्वाबो से,
कहीं भागते- भागते,उसकी तलाश में,
मैं कहीं तनहा न रह जाऊं....
 
आगे कोई हैं या नहीं क्या पता  ?
सूनी-सूनी सी डगर लगती हैं..

जिसकी हैं तलाश मुझे,
कहीं वो मेरे साथ तो नहीं.. 
जिंदगी कहती हैं ,एक दिन ये नज़र उसे पहचान ही लेगी..



1 comment:

बी.एस.गुर्जर said...

कभी कभी डर लगता हैं इन ख्वाबो से,
कहीं भागते- भागते,उसकी तलाश में,
मैं कहीं तनहा न रह जाऊं....

आगे कोई हैं या नहीं क्या पता ?
सूनी-सूनी सी डगर लगती हैं..बहुत उम्दा सोच है किसी अनजाने धुंधले
चहरे को खावो से हकीक़त में लेन की की .
...बहुत -२ शुक्रिया ...

...////...../////,..../////..//////.....//////...

न पूछो तो बता दूँ
पूछो तो न बताउँ...
अगर बिना पूछे बता दूँ ..
तो सायद तुम्हे समझा पाउँ...
ये पहेली कैसी है में ही बुनोँ ,
और में ही उलझ जाउँ....
अगर मिल जाये दो पल तो,
अजान आप मेरी कवितओं की दुनिया में
अगर आप समझ जाओ मुझे तो सायद में तुम्हे समझ पाउँ ...
>>>...///.....///...<<<...

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